संपादकीय विभाग व संरक्षक बोर्ड

प्रबंध संपादक-अनिल यादव (इंजीनियर), एसोसिएट एडिटर- राव धर्मेंद्र (कोसली), संरक्षक- राजेंद्र बहादुर यादव (मुंबई), राजकुमार यादव (कापसहेड़ा), मुकेश यादव (नांगलोई), सुबोध यादव (कापसहेड़ा), महेंद्र सिंह यादव (गुरुग्राम), अशोक यादव (बहरोड़), राजेंद्र यादव (गुरुग्राम), विक्रम यादव, रविन्द्र यादव (दिल्ली), संजय यादव (लखनऊ), मदन सिंह यादव (इंदौर), छती यादव (दिल्ली), ओ. पी. यादव (द्वारका-दिल्ली), बाबूलाल यादव (द्वारका-दिल्ली), उम्मीद सिंह (गुरुग्राम), नवीन यादव (उप्र), श्रीभगवान यादव (दिल्ली) . मार्गदर्शक- आर एन. यादव (कल्याण), जगपती यादव (दहिसर), राधेमोहन यादव (रिको रबर), प्रेमसागर यादव, अवधराज यादव (अध्यक्ष-अ. भा. व. युवा यादव महासभा, उत्तर प्रदेश)

यदुवंश गौरव का नया अंक ... शीघ्र आप तक ...



1 comment:

  1. साहित्य समाज का दर्पण होता है । कर्तव्य निर्वाहन धर्म है । जिसको सबलोग धर्म मानते है । वह पंथ है । साहित्य के द्वारा ही उस समय के लोगो के रहन सहन रीति रिवाज व् बौद्धिक जानकारी मिलती है । उसका आकलन करके वर्तमान समय में लाभ लिया जा सकता है । इसीलिए कहा गया है , साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय , सार सार को गहि रहे थोथा देइ उड़ाय । जब इतना विवेक जागेगा तब संसय मिटेगा । गुमराह करके वोट बैंक बनाया जाता है । विवेकवान करके शिखर पर पहुचाया जाता है ।

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